प्रियंका श्रीवास्तव

प्रियंका श्रीवास्तव

मंगलवार, 19 अक्तूबर 2021

यंग ब्लड !

 

                         हॉस्पिटल के मैनेजमेंट की मीटिंग चल रही थी।  एचआर  निधि से प्रगति और समस्या के बारे में पूछा है रहा था।  

                   " मैं समझती हूँ कि जो काम मिश्रा जी सँभाल रहे हैं , उसके लिए कोई नौजवान होना चाहिए और फिर वे अब रिटायरमेंट की उम्र पर आ ही गए हैं। " 

                     डायरेक्टर उनके कथन को बड़े गंभीरता से सुन रहे थे  और एचआर को ये पता था कि मिश्रा जी  उस के पिता के मित्रों में हैं और डायरेक्टर साहब के पिता के मित्रों में भी हैं ।

                      "मैडम ये बतलाइये कि मिश्रा जी अपने काम को नहीं कर पा रहे हैं। "

                      "ऐसा  तो नहीं है , फिर भी एक यंग ब्लड को भी मौका मिलना चाहिए। "

                      "बिल्कुल , कभी यही बात मुझसे कही थी मिश्रा जी ने , जब आप पढ़ कर आयीं थी और आपके फादर ने मिश्रा जी से कहा था कि  इसको कहीं मौका दिलवा दीजिये। "

                       " सर वो मेरा मतलब यह है कि ........ !

                       " आप और लोगों को हायर करना चाहें तो बताएं लेकिन मिश्रा जी के बारे में मैं बता दूँ कि अगर वह नहीं भी आएंगे या काम नहीं करेंगे तब भी उनको हटाया नहीं जाएगा। उनकी सैलरी उनके अकाउंट में जाती रहेगी। ।  वो मेरे भी फादर के मित्र है और इस हॉस्पिटल की नींव जब रखी गयी थी तो मिश्रा जी हमारे साथ थे,आज भी हैं और आगे भी रहेंगे। "

                       "कुछ और कहना है ?"

                      "नो सर। "

                 

3 टिप्‍पणियां:

  1. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना शुक्रवार २२ अक्टूबर २०२१ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।

    जवाब देंहटाएं