अंतर्वेदना

अभी तक ये ब्लॉग मेरी माँ ने संभाला था लेकिन इस बार जब मेरे काम की दृष्टि से इसके उपयोग को उन्होंने बताया तो मैंने इसको खुद ही लिखने का संकल्प लिया है और आशा करती हूँ कि मेरे द्वारा दी गयी जानकारी आप सबके लिए उपयोगी साबित होगी. हो सकता है कि आप या आपके आस पास के लोग जानकारी के अभाव में सही दिशा में न जा रहे हों तो इससे सही दिशा मिल सके मेरे लेखन की इसी में सफलता होगी.

शुक्रवार, 22 नवंबर 2024

मानवता ! (88)

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         मानवता !                               सर्वेंट क्वार्टर में ड्राइवर की पत्नी पीड़ा से तड़प रही थी।  कोई ले जाने वाला नहीं था और ...
बुधवार, 13 नवंबर 2024

हवेली की आत्मा ।*

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हवेली की आत्मा!                                    वह मुरझाई सी एक कमरे में उदास बैठी थी। वह तो छोड़ कर कहीं जा भी नहीं सकती है। भले ही नाम ...
सोमवार, 4 नवंबर 2024

खेप !(67)

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.                                                            खेप !       "हां राम भरोसे नई खेप कब तक मिलेगी? बाहर वालों का दबाव बढ़...

किन्नर ! (106)***

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किन्नर !            "हे ईश्वर मेरा क्या दोष है? जो मुझे इस रूप में पैदा किया।  क्या हमारे जीने की इच्छाएं , कामनाएं सिर्फ औरों को देन...
शनिवार, 30 सितंबर 2023

छूतपाक !(55)

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छूत पाक!                   रीना पति के साथ उनके मित्र के यहाँ गयी , अपनी नौकरी के कारण उसकी पत्नी के साथ खास मौके पर ही मुलाकात होती थी।  मि...
4 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, 19 अक्टूबर 2021

यंग ब्लड !

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                           हॉस्पिटल के मैनेजमेंट की मीटिंग चल रही थी।  एचआर  निधि से प्रगति और समस्या के बारे में पूछा है रहा था।           ...
3 टिप्‍पणियां:
सोमवार, 13 मई 2013

बेटी का माँ को सन्देश !

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 कल रात मुझे ये एस एम एस मिला मेरी बेटी सोनू का , और जब उसको पढ़ा तो आंसू अपने आप गिरने लगे कोई बेटी अपनी माँ से ऐसा कहती है कहा तो बोली आप ...
13 टिप्‍पणियां:
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मेरे बारे में

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रेखा श्रीवास्तव
मैं अपने बारे में सिर्फ इतना ही कहूँगी कि २५ साल तक आई आई टी कानपुर में कंप्यूटर साइंस विभाग में प्रोजेक्ट एसोसिएट के पद पर रहते हुए हिंदी भाषा ही नहीं बल्कि लगभग सभी भारतीय भाषाओं को मशीन अनुवाद के द्वारा जन सामान्य के समक्ष लाने के उद्देश्य से कार्य करते हुए . अब सामाजिक कार्य, काउंसलिंग और लेखन कार्य ही मुख्य कार्य बन चुका है. मेरे लिए जीवन में सिद्धांत का बहुत बड़ी भूमिका रही है, अपने आदर्शों और सिद्धांतों के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया. अगर हो सका तो किसी सही और गलत का भान कराती रही यह बात और है कि उसको मेरी बात समझ आई या नहीं.
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