प्रियंका श्रीवास्तव

प्रियंका श्रीवास्तव
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बुधवार, 18 मई 2011

कैसी दुनियाँ !

दिखा रहे हैं दिल में ख़ुशी, पर चेहरे पे नकली शोक,
पता नहीं हैं कैसे हाय रे ये दुनिया के नकली लोग।

शायद इनको मिलती है ख़ुशी दूसरे के दुःख पाने से,
नहीं कोई मतलब इनको  अपने सुख आने से।

अपनी मंजिल पाने को दूसरे पर चढ़ जाना है,
खींच कर टांग दूसरे की खुद आगे बढ़ जाना है।

पता नहीं दिल में भरकर बैठे हैं द्वेष ही द्वेष,
दिखा रहे मुँह पे है उनके प्यार का सन्देश।

इस जग रहकर मन में भरकर इतने सारे पाप ,
खुद ही सोचें ऐसे कहाँ तक पहुँच पाएंगे आप।


*सोनू की कलम से *